रक्तिम होते पलाश

(मंजुला बिष्ट) सुनो, हुरियारिन ! जाते फ़ागुन में पलाश के बीज़ों को हवाओं का अतिथि होने का आमंत्रण देना ताकि वह आगामी फगुनाहट में

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