वैचारिक विपन्नता की दहलीज पर सियासत का खेल

(मोनिका अग्रवाल) भारतीय राजनीति आज वैचारिक संक्रमण के दौर से गुजर रही है। अपने कथ्य को सत्य, न्यायसंगत व तर्कसंगत साबित करने के लिए

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संथाल परगना इतना खूबसूरत क्यों है

संथाल परगना (झारखण्ड): यह भव्य नहीं है, यह अद्भुत भी नहीं है –लेकिन इसकी खूबसूरती अपने आप में बेमिशाल है. यह संथाल परगना है.

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हिन्दी साहित्य में एक नया प्रयोग: शिमला की डायरी

बिहार के भागलपुर शहर और भारत के एकदम उत्तर-पूर्व में बसे अरुणाचल प्रदेश में अपना जीवन जीने वाले डॉ राजेश वर्मा की पुस्तक “शिमला

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रक्तिम होते पलाश

(मंजुला बिष्ट) सुनो, हुरियारिन ! जाते फ़ागुन में पलाश के बीज़ों को हवाओं का अतिथि होने का आमंत्रण देना ताकि वह आगामी फगुनाहट में

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नहीं रहे “मेरे अपने” विनोद खन्ना

सत्तर के दशक की शुरुआत में विनोद खन्ना की एक फिल्म आयी थी मेरे अपने. उनके साथ किरदार में थे शत्रुहन सिन्हा. लेकिन इन

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मीनाक्षी की “बस तुम्हारे लिये” साहित्य के प्रति समर्पण है

यह जो वाक्य है “बस तुम्हारे लिये” इसमें समर्पण का भाव है. समर्पण किसी व्यक्ति के प्रति किसी व्यक्ति का हो सकता है, और

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