निशिकांत ने झारखण्ड में भाजपा को संकट में डाला

रांची:

संथाल परगना में गोड्डा लोकसभा से भारतीय जनता पार्टी सांसद निशिकांत दुबे ने जिस तरीके से झारखण्ड मुक्ति मोर्चा सुप्रीमो और दुमका के सांसद शिबु सोरेन के बारे में अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया उससे झारखण्ड में भाजपा की परेशानी बढ़ गयी है.

सूत्रों के अनुसार, भारतीय जानता पार्टी के केंद्रीय नेता इस प्रयास में थे कि किसी भी हालत में झारखण्ड में विपक्ष का कोई गठबंधन न हो सके और इसके लिए पार्टी झारखण्ड मुक्ति मोर्चा की तरफ हाथ बढ़ने को तैयार हो रही थी.

पिछले 10 नवम्बर को दुमका रेलवे स्टेशन पर एक कार्यक्रम में निशिकांत ने कह दिया कि शिबु सोरेन संसद में कुछ नहीं बोलते तो उनके चेहरे पर कालिख पोत देनी चाहिए.

निशिकांत हलाकि अब अपने फेसबुक के माध्यम में इसपर सफाई दे रहे है और यह दिखने की कोशिश कर रहे हैं कि वह गुरूजी (शिबु सोरेन) की आदर करते हैं, पर अब तीर कमान से निकल चुका लगता है.

अभी भाजपा के तमाम बड़े नेता मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ जैसे विधान सभाओं के चुनाव में व्यस्त हैं; फिर भी उन्हें इस बात का अंदाजा हो गया है कि झारखण्ड में शिबु सोरेन के अपमान का क्या परिणाम हो सकता है.

निशिकांत ने जब अपने भाषण में शिबु के खिलाफ ऐसी बातें कहीं तो झारखण्ड सरकार की कल्याण मंत्री लुईस मरांडी भी वहां उपस्थित थीं. सूत्रों के अनुसार भाजपा इस बार लुईस को दुमका लोकसभा से शिबु सोरेन के खिलाफ चुनाव में उतारना चाह रही है.

निशिकांत के इस बयान ने एक ही सेकेण्ड में संथाल परगना में भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.

सूत्रों के अनुसार, पूरा आदिवासी समाज, जिसे बचाने के लिए शिबु सोरेन ने अपना जीवन लगा दिया, भाजपा के खिलाफ उठ खडा हो सकता है. इसमें सबसे बड़ा राजनीतिक घाटा लुईस मरांडी को ही होगा.

शिबु सोरेन की राजनीतिक शक्ति से स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी परिचित हैं. लिट्टीपाड़ा विधानसभा के उप चुनाव में मुख्यमंत्री रघुबर दास, मंत्री लुईस मरांडी और यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए सारी ताकत लगा दी, पर शिबु सोरेन के सामने वे टिक नही पाए.

गौरतलब है कि इस उप चुनाव में मुख्यमंत्री रघुबर दास ने शिबु सोरेन को अपना पिता बताया था. आज निशिकांत के उस बायान से हो सकता है कि रघुबर को भी दिल में दर्द हुआ हो. रघुबर दास इन दिनों पूरी कोशिश में हैं कि भाजपा के खिलाफ हो चुके आदिवासी समाज को फिर से कैसे जोड़ा जाए, किन्तु निशिकांत और लुईस मरांडी की राजनीतिक जोड़ी ने पार्टी को संकट में डाल दिया है.

सूत्रों के आनुसार भाजपा के राष्ट्रीय नेता, अमित साह सहित, यह नहीं चाहते कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा राज्य में बाबूलाल मरांडी के झारखण्ड विकास मोर्चा और कांग्रेस तथा राजद के साथ अगले चुनाव में कोई समझौता करे.

शिबु सोरेन को आदिवासी समाज का दिशोम गुरु (पूरे आदिवासी जगत का गुरु) माना जाता है. निशिकांत ने अपने कथित बड़बोलेपन से जाने-अनजाने में झारखण्ड में भाजपा को पूरी तरह से संकट में डाल दिया है.

 

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