गोड्डा में अडाणी पॉवर प्लांट पर जेवीएम-भाजपा आमने -सामने

गोड्डा (झारखण्ड):

किसी के शानों पर अपने सिर को झुकना एक जिल्लत भरी जिन्दगी होती है!

पिछले कुछ दिनों से झारखण्ड के गोड्डा जिले में ऐसा ही कुछ हो रहा है.

मामला एक पॉवर प्लांट का है, जिसे यहाँ से हजारों किलोमीटर दूर गुजरात के एक उद्योगपति अडाणी लगा रहे हैं.

केंद्र और झारखण्ड में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के होने का फायदा अडाणी पॉवर प्लांट को यह मिल रहा है कि किसान, खासकर आदिवासी महिलाएं, अडाणी के अधिकारियों के पैरों पर गिर रही हैं पर सरकार उन्हें इस जिल्लत की जिन्दगी से बचा नहीं रही है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गोड्डा में अडाणी के पॉवर प्लांट को लेकर जो कुछ हो रहा है वह 2019 के लोक सभा और फिर उसी साल होने वाले झारखण्ड विधान सभा के चुनाओं के एक मुद्दे के रूप में खडा हो जएगा.

सूत्रों के अनुसार गोड्डा के ग्रामीण इलाके में इसके खिलाफ जो उबाल देखने को मिल रहा है उसका सीधा असर भारतीय जानता पार्टी के सीटिंग सांसद निशिकांत दुबे के राजनीतिक कैरियर पर पड़ सकता है. दुबे ने इस पॉवर प्लांट का समर्थन किया है. उनके अनुसार यह विकास का एक रास्ता खोलेगा.

लेकिन किसानों के मामले में सरकार एकदम से चुप है तो निशिकांत की परेशानियाँ एक तीसरे ही पाइप लाइन में धुस रही हैं.

इन दिनों भाजपा सांसद निशिकांत दुबे प्रायः हर सप्ताह दिल्ली से अपने गोड्डा लोकसभा क्षेत्र के लिए एक नई घोषणा करवा रहे हैं. एक दिन पहले गोड्डा-पीरपैंती (बिहार) फोर लेन सड़क के टेंडर की घोषणा हुई. उसी तरह रेल परियोजना, एअरपोर्ट, एम्स और कई सड़कों की घोषणाएं भी वे करवा चुके हैं.

एक सप्ताह पहले निशिकांत दुबे ने जसीडिह रेलवे स्टेशन के नाम बदलने की भी घोषण कर चुके हैं. इसके लिए आसनसोल से डीआरएम के साथ उनकी बातचीत भी हुई बतायी जा रही है.

“किसी स्थान के नाम बदलने से क्या होता है? इससे बेहतर तो यह होता कि उनकी सरकार एक नए स्टेशन का निर्माण कर उसका नाम अपनी मर्जी से रख लेते. वे (सांसद) देवघर तक ही सिमट कर रह गए हैं, जबकि उनका क्षेत्र गोड्डा कहलाता है, गोड्डा के अन्दर क्या हो रहा उसकी चिंता उन्हें नहीं है,” पॉवर प्लांट के इलाके के लोगों का कहना है.

इससे पहले निशिकांत दुबे ने जिंदल पॉवर प्लांट को गोड्डा लाने की कोशिश की थी. इस प्लांट का शिलान्यास 2013 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने किया था, पर आगे चलकर यह मामला गड़बड़ा गया और प्लांट नहीं लगा.

फिलहाल अडाणी का खौफ गोड्डा में इस कदर है कि पॉवर प्लांट से जुड़े इलाके में सरकार को बार- बार पुलिस भेजकर शांति स्थापित करनी पड़ती है.

पिछले सप्ताह इस इलाके के माली गाँव में जो हुआ उससे एक बड़ा हंगामा पूरे झारखण्ड में फैलने की स्थिति आ गयी दिखती है. महिलाएं अडाणी के लोगों के पैरों पर गिर रही हैं कि उनके जमीन को न लिया जाये. सरकार यह साफ़ नहीं कर रही कि जो महिलाएं उद्योगपतियों के पैरों पर गिर रही हैं क्या उन्होंने अपनी जमीन के लिए मुआवजा ले लिया है?

झारखण्ड विकास मोर्चा ने इसे शुरुआत से ही एक मुद्दा बननाया है. पोडैयाहाट के विधयक प्रदीप यादव ने जब पिछले साल प्लांट के खिलाफ आन्दोलन किया था तो सरकार ने उन्हें लगभग पांच महीने जेल में रखा.

पिछले सप्ताह की घटना के बाद झारखण्ड विकास मोर्चा सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार ने एक प्रकार से गोड्डा में ब्रिटिश रूल को लागू कर रखा है. जमीन के लिए जबरदस्ती है और सबसे बड़ी बात तो यह है कि अडाणी गोड्डा पॉवर प्लांट लगाकर बांग्लादेश को बिजली बेचेंगे. झारखण्ड को इससे क्या लाभ होगा? मुख्यमंत्री रघुबर दास ने इसपर कभी कोई खुलासा नहीं किया.

अगले 12 सितम्बर को विकास मोर्चा ने गोड्डा चलो का नारा दिया है. सोशल मीडिया पर जो रोष दिख रहा है उससे आशंका है कि राज्य के दूर दराज से लोग गोड्डा पहुच सकते हैं. जमावड़ा पोडैयाहाट में होना बताया जा रहा है.

 

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