सीमा पे सिपाही बैठा है, जरा बोल धीमा -धीमा (भलजोर की कहानी)

भलजोर (बांका):
यह बॉर्डर लाइन है झारखण्ड और बिहार का. इसे भलजोर कहा जाता है.
मूलरूप से बिहार समतल भूमि वाला एक उपजाऊ प्रदेश है, लेकिन जहाँ जो पहाड़ हैं वह बेहद खूबसूरती प्रदान करता है.
भलजोर की सीमा पर बिहार वाले इलाके में कुछ पहाडी क्षेत्र है जिसे माली माउंटेन कहा जाता है.
यहाँ पर नीतीश कुमार की सरकार ने एक पुलिस पोस्ट बना रखा है. इस पुलिस पोस्ट पर जो कॉप्स हैं उनका काम झारखण्ड के रास्ते बिहार में चोरी छुपे ले जाया जाने वाले शराब को पकड़ना है.
कारण है बिहार में शराब बंदी. जबसे बिहार में नीतीश सरकार ने शराब बंदी लागू की है और कड़े कानून बनाये हैं, सीमावर्ती इलाकों में शराब के तस्करों को पकड़ने के लिए दरवान बिठा दिए गये हैं.
जब बिहार में शराब बंदी लागू हुई थी तो नीतीश महागठबंधन की सरकार में लालू यादव के साथ थे. झारखण्ड में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी. नीतीश ने कई बार झारखण्ड सरकार से आग्रह किया कि वह अपनी सीमा पर सिपाही बिठा दें ताकि माफिया लोग चोरी छुपे बिहार में शराब ना भेज सकें. पर तब झारखण्ड सरकार उदासीन रही.
भलजोर, जो दुमका और गोड्डा जिले को बिहार के बांका से जोड़ता है, वहां पर एक वीरान सी जगह में नीतीश सरकार ने पुलिस केंप लगा दिया.
फिर भी शराब माफिया सक्रिय रहे. खासकर बांका जिले में अबतक हजारों शराब की बोतलों को पुलिस ने बरामद किया है. मतलब साफ़ है, शराब की तस्करी जारी है. सीमा पर सिपाही बैठा है, फिर भी.
जो सिपाही भलजोर के पास रहते हैं, उनका खाना –पीना भी उसी वीराने में होता है. जब भी कोई गाडी दुमका और देवघर से इस रस्ते गुजरती है उसे वे चेक करते है. अब तो वे भी थक गए हैं. तो, यह मान कर चला जा रहा है कि आखिर कितनी गाड़ियों को हर बार देखा जाएगा.
भलजोर से लगभग 80 किलोमीटर उत्तर भागलपुर है जहाँ गंगा नदी पर एक पुल है जो नवगछिया होते हुए राष्ट्रीय राजमागर- 30 को पार कर बंगाल और असाम तक का रास्ता प्रदान करता है. इस वजह से हजारों ट्रक हर रोज भलजोर की सीमा से गुजरती है. इसे देखने के लिए एक दर्जन से भी कम सिपाही बिठाया गया है.
बिहार में शराब बंदी पर इतने कड़े क़ानून हैं कि पीने वाले को दस साल की सजा हो सकती है. इस फैसले के विरोध में मामला सुप्रीम कोर्ट में पडा है. सूत्रों के अनुसार नीतीश सरकार इसपर कुछ विचार कर रही है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि शराब बंदी का फैसला सामजिक बुराइयों के खिलाफ था. लोगों को और भी जागरूक करना होगा.

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