दुमका में भाजपा के 13,000 वोट कहां गए, रघुबर ने खुद पूछा था

दुमका:
यदि भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं की मानें तो झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुबर दास पिछले दिनों जब दुमका में चल रहे अपनी पार्टी के अन्दर के विवाद को सुलझाने आये थे तो उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूछा था कि भाजपा के दुमका शहर में पारंपरिक 13,000 वोट कहाँ चले गए?
मामला था नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस से हाल ही में भाजपा आयीं अमिता रक्षित का. पार्टी ने सभी मेहनती कार्यकर्ताओं की सलाह को दरकिनार कर एक मंत्री के कहने पर अमिता रक्षति को अध्यक्ष पद का टिकट दिया. इस घटना से भाजपा के पारंपरिक मतदाता ऐसे भड़के कि आज एक निर्दलीय उम्मीदवार श्वेता झा ने अमिता रक्षति को लगभग 8000 मतों से पराजित कर दिया.
मुख्यमंत्री रघुबर दास मतदाताओं के मूड को समझ गये थे. उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वे उम्मीदवार न देखें, पार्टी के निशान कमल को खिलाएं.
लेकिन दुमका के भाजपा में तो कुछ और ही चल रहा है.
यह संथाल परगना में भारतीय जनता पार्टी के लिए एक खतरे की घंटी बताई जा रही है. दुमका में भाजपा उपाध्यक्ष का पद भी हार गयी. यह पद भी एक निर्दलीय बिनोद लाल के खाते में गया.
सूत्रों के अनुसार भाजपा ने संथाल परगना के पिछले दो बड़े चुनावों में दुमका की विधायक और कल्याण मंत्री लुईस मरांडी पर भरोसा किया और दोनों बार उसे मुह की खानी पडी.
पहला था लिट्टीपाडा विधान सभा का उप चुनाव जिसमें लुईस मरांडी को चुनाव प्रभारी बनाया गया था और दूसरा इस बार का दुमका नगर निकाय का चुनाव. इस दोनों हार में घुमा के देखा जाए तो मुख्यमंत्री रघुबर दास की सबसे बड़ी विफलता है.
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पिछले चार साल में दुमका की राजनीति में भाजपा आपसी लड़ाई और ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देने की वजह से खुद बर्बाद हो गयी है.
2014 के विधान सभा चुनाव में लुईस मरांडी ने झारखण्ड मुक्ति मोर्चा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पराजित कर सबको चौंका दिया था. लेकिन भाजपा के अन्दर उनके समर्थक यह भूल गये कि वह मोदी लहर था, ना कि लुईस का कोई राजनीतिक जादू. लुईस के कुछ ख़ास समर्थकों ने पिछले चार वर्षों के जिस तरह से मनमानी की उससे दुमका शाहर के पार्टी का जानाधार ही टूट गया. लगभग सारे पुराने भाजपाई शीत निद्रा में चले गए.
इस नगर निकाय के चुनाव के दौरान ही लुईस खेमें में एक हताशा देखी जा रही थी. एक भाजपाई ने आरोप लगाया कि इसका कारण यह था कि उनके खेमें में किसी को राजनीतिक समझ नही थी, अधिकांश ठेकेदारी में व्यस्त रहने वाले वो लोग थे जो मंत्री को हमेशा गलत सलाह देते रहे. मतदान के दिन तो नगर में भाजपा के कार्यकर्ता दिखाई ही नहीं पड़ रहे थे. इस चक्कर में भाजपा के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार गरीब दास भी घायल हो गए जिनके समाज की अपनी खुद की 9000 वोट थी.
सूत्रों की माने तो मंत्री ने इस गलती को मतदान के कुछ दिन पूर्व अपने निकटतम लोगों के सामने स्वीकार कर लिया था कि पार्टी में एक गलत उम्मीदवार का चुनाव हो गया.
जो लोग भाजपा के टिकट के दावेदार थे उनका आरोप है कि अमिता रक्षित ने उन्हें सलाह दी थी कि यदि वह इस चुनाव को जीत जाती हैं तो 2019 में वह विधान सभा का चुनाव संथल परगना के नाला विधान सभा क्षेत्र से लड़ेंगी और यह सीट (नगर अध्यक्ष) का खाली हो जाएगा.
सूत्रों के अनुसार इस बात की जानकारी भाजपा के बड़े नेताओं को मालूम हो गई थी.उनमें से एक तो खुद नाला से चुनाव लड़ने की अभी से ही तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में दुमका में पार्टी के अन्दर भितरघात होना कोई बड़ी बात नही थी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *