झारखण्ड में गर्म हवा, कोहरा और बारिश के साथ ओले भी दिख रहे हैं

संथाल परगना:
झारखण्ड के संथाल परगना में एक ही साथ गर्म हवाएं, तेज झोकों के साथ बारिश और वर्फ का गिरना और फिर सुवह को कोहरा भी दिखाई दे रहा है.
दुनिया का मौसम तेजी से बदल रहा है इसका इससे बेहतर उदहारण और कहां मिल सकता है.
राजनीति में आकंठ डूबे लोगों को इस बात की तनिक भी फ़िक्र नहीं कि यह बदलाव आने वाले दिनों में संथाल परगना को कितना गहरा घाव देगा. ना तो मौसम विज्ञान से जुड़े लोग इसका अध्यन कर रहे हैं और ना की सत्ता से जुड़े नेता. दरअसल यह विषय उनके लायक है ही नहीं.
इस रिपोर्ट में संथाल परगना के दुमका, साहेबगंज और पाकुड़ जिले के तीन तस्वीरों को पेश किया जा रहा है जिसमें मौसम के बदलते रूप को देखा जा सकता है.
तीन दिनों पहले दुमका के शिकारीपाड़ा इलाके में लगभग 6 बजे सुवह को आचानक कोहरे ने पूरे इलाके को घेर लिया.
यहां से लगभग 150 किलोमीटर दूर पूरब की तरफ साहेबगंज में खुश्क हवाएं चल रही थीं जो एक गाँव लालबथानी को दो दिनों पूर्व जलने के लिए सहायक बनी.

हिंदी साहित्य में एक चिंगारी की ताकत इस रूप में दिखाई गयी है कि यदि वह छप्पर तक चली जाये तो प्रचंड फैला सकती है. लालबथानी टोला में अधिकांश घर फूस के थे जिसे एक चिगारी ने गर्म हवा का सहारा ले पूरी तरह से राख कर दिया.
उसके अगले ही दिन दुमका के ननकू कुरवा में भी यही हाल हुआ.
तो जहाँ लोग कोहरे और गर्म हवा से दो –चार हो रहे थे वहाँ से लगभग 75 किलोमीटर दूर पाकुड़ जिले के हिरणपुर में लोगों ने शनिवार को वारिश और भरपूर ओले को भी गिरते देखा.
झारखण्ड के संथाल परगना का वातावरण एक ही तरह का माना जाता है. साहेबगंज थोड़ी दूर तक गंगा के किनारे बसा है तो वहां राजमहल की पहाड़ियां भी है जो पाकुड़ के दामिन इलाके को घेरती हुई दुमका तक पहुँच जाती है.

जानकारी के मुताविक अब इस इलाके में मात्र 10 प्रतिशत जंगल बचे हुए हैं. होना 30 प्रतिशत चाहिए था. साहेबगंज की गंगा नदी भी अधिकांश स्थानों पर सूखी ही नजर आती हैं. इस इलाके में जो मौसम का बदलाव देखा जा रहा है उसमें सबकुछ एक साथ ही घुलता जा रहा है-गर्मी भी है, बारिश और ओले भी और आश्चर्य यह कि सुवह कुहशा भी.

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