बिहार में बेनामी संपत्ति कोई मुद्दा नहीं, मुद्दा है नीतीश के बढ़ते क़दमों को रोकना

पटना:
बिहार को राजनीति से छुटकारा नहीं मिल सकता.
फिलहाल राष्ट्रीय जानता दल सुप्रीमो लालू यदव और भारतीय जानता पार्टी के सीनियर नेता सुशील कुमार मोदी आपस में गलथेतरी कर रहे हैं.
मुद्दा है किसने कितना नाजायज कमाया.
सुशील मोदी पहले भी लालू यादव के खिलाफ ऐसे कई मुद्दे उठा चुके है. वर्ष 1996 में मोदी ने चारा घोटाले में लगातार लालू यादव के खिलाफ एक अभियान चलाया था जिसकी परिणिति यह हुई कि आज लालू को अदालत ने चुनाव लड़ने से भी दूर कर रखा है.
इस बार मोदी के निशाने पर लालू का पूरा परिवार है. खास कर लालू के दोनों मंत्री पुत्र-तेज प्रताप उर तेजस्वी यादव.
सुशील मोदी जो कागजात पेश कर आरोप लगा रहे उसमे ऐसा लगता है कि लालू यादव के पुत्रों ने आकूत धन कमाया है जिसमे कई बेनामी सम्पति है.
लालू डिफेंसिव राजनीति नहीं खेलते, वह पलटवार करते हैं. शनिवार को राजद के एक प्रवक्ता ने सुशील मोदी के भाई पर मनी लांड्रिंग का आरोप लगाया.
इसमे सबसे गंभीर बात यह थी कि सुशील मोदी बार बार कलकत्ता क्यों जाते हैं. कलकत्ता जाने का बहुत सारा अर्थ लगया जाता है. यह एक फ्रेज बन चुका है, जो जानते हैं वह समझ जायेंगे. ऐसा आरोप मोदी पर राजद के एक प्रवक्ता ने लगाया.
दरअसल बिहार में घिनौनी राजनीति चल रही है.
जब नीतीश कुमार भाजपा के सहयोग से बिहार में मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने पटना में कई बेनामी सम्पति रखने वालों के घरों को सीज करवा दिया था. वे कहते थे कि इन घरों में स्कूल खोले जायेंगे.
फिलहाल नीतीश कुमार दोनों पक्षों के आरोपों पर कोई कार्यवाई करने की स्थिति में नहीं दिखते. सरकार गिर जायेगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बेनामी संपत्ति के बारे में बहुत कुछ कह चुके हैं. देश में ऐसी सम्पति की भरमार है. राजद के प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री से गुहार लगाईं कि वे सुशील मोदी के परिवार की बेनामी संपत्ति की जाँच कराएँ.
लेकिन जब उनसे पूछा गया कि बिहार में तो राजद की सरकार है फिर सुशील मोदी के परिवार की बेनामी संपत्ति पर सरकार कार्यवाई क्यों नहीं करती तो वे गोलमोल जबाव दे कर निकल गए.
दरअसल भाजपा और राजद दोनों एक दूसरे को तौल रही है जिसमे राजनीति यह है कि कैसे नीतीश की सरकार गिरे और नीतीश फिर से भाजपा के सहयोग से सरकार बनायें.
नीतीश कोई कच्चा खिलाड़ी नहीं है. वह इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि बनाने में लगे हैं ताकि 2019 के आम चुनाव में सभी विपक्षी दल उन्हें प्रधानमंत्री का उम्मीदवार धोषित कर दें. अभी हाल ही में कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी से मिल कर आये हैं.
लालू और सुशील मोदी कोई मुद्दा नहीं है. मामला है नीतीश को उस रस्ते पर जाने से रोकना जिसमे वे नरेंद्र मोदी के लिए रुकाबट बन सकते हैं.

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