9 अप्रैल से बिहार के भागालपुर में 60 घंटे इन्टरनेट सेवा बंद क्यों रही

भागलपुर: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले रविवार को जब बिहार में महात्मा गाँधी के चंपारण सत्याग्रह के सौ वर्ष होने पर पटना में हर्ष प्रकट कर रहे थे, कुछ खुराफातियों ने भागलपुर को एक बार फिर से दंगे की चपेट में लाने की कोशिश की.
यह तो जिला प्रशासन, पुलिस कप्तान और समाज में हिन्दू –मुस्लिम सौहार्द को बनाये रखे वालों की मेहनत कहिये कि भागलपुर एक बार फिर से कलंकित होने से बच गया.
जिला प्रशासन ने रविवार की दोपहर से भागलपुर में हर तरह के इन्टरनेट सेवा तो ठप करवा दिया. ऐसा इसलिए किया गया कि कुछ लोगों ने अपनी वाहवाही लूटने के ख्याल से ऐसी तस्वीरों को फैलानी शुरू कर दी थी जो आगे खतरनाक हो सकती थी.
पिछले तीन दिनों से जिला प्रशासन और शांति समिति के बीच जो बैठके चल रही हैं उसमें समस्या की जड़ में उस इलाके में गैकानूनी तरीके से बूचड़खाना चलाये जाने का मामला सामने आया है.
आम नागरिकों के अनुसार यह आँखों पर पर्दा डालने वाली चीज है. यह एक प्रशासनिक और कानूनी मसला है जसमे जिला प्रशसन ने साफ़ तौर पर कह दिया कि गलग और गैरकानूनी तरीके से बूचडखाने को नहीं चलने दिया जाएगा.
लेकिन तनाव का कारण कुछ और ही दिखाई पड़ता है. यह मामला समाज में रहने वाले लोगों के बीच आपत्ति दर्ज करने और उससे इनकार करने से थोड़ा ऊपर का दिखता है.
भागलपुर-दुमका मार्ग के एक बहुत ही व्यस्त सड़क पर भागलपुर रेलवे स्टेशन से महज दो किलोमीटर दक्षिण की और सड़क के किनारे एकदम छोटा सा हनुमान मंदिर है. कुछ लोगों का आरोप है कि उसके आसपास कई गैरकानूनी बूचड़खाने चलाये जाते हैं.
उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ के शासन के आने और बूचडखाने पर पहले ही दिन से कारवाई किये जाने को देख संघी मानसिकता के लोगों की सनक वहां की सीमाओं से बाहर निकल गयी है.
“बिहार में नीतीश और लालू का राज है जहाँ ऐसी हरकतों को कतई बर्दास्त नहीं किया जता. बूचडखाना चले या ना चले इससे भागलपुर की उस आम जनता को कोई मतलब नहीं जिन्हने 1989 में दंगे में एक हजार से भी अधिक लोगों को क़त्ल होते देखा है. इस बार की घटना एक साजिश के अलावा कुछ भी नहीं थी,” हुसैनाबाद बाल्टी कारखाना के मनोज मंडल में कहा.
लोगों ने रविवार की सुवह देखा कि उस सड़क के किनारे छोटे से धार्मिक स्थल पर कुछ आपतिजनक चीज पडा है. साथ में एक लिफाफ भी पुलिस को मिला जिसमे लाल अक्षरों से उसी इलाके के कुछ नेताओं के नाम भी लिखे हुए हैं.
हलाकि पुलिस इसे अपने कब्जे में लेकर सीसी टीवी कैमरे से उस व्यक्ति की पहचान कर रही है जिसने इन गलत वस्तुओं को वहां पर रखा था. अभी तक सफलता नहीं मिली है.
स्थानीय लोग चुपके-चुपके जो बहस करते हैं उसमे यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी बूचड़खाने को चलने वाले ने ऐसा किया होगा तो उसे एक लाल लिफाफ रखने की क्या जरूरत थी? मूर्खों के समाज में उन्माद तो ऐसी ही एक हड्डी को फेक देने से भड़क जाता है, तो फिर बंद लिफाफे में सन्देश देने की क्या जरूरत थी.
पुलिस को एक सफेदपोश नेता पर संदेह है जिसका नाम लिफाफे में है. सूत्रों के अनुसार आने वाले नगर निगम के चुनाव में वह व्यक्ति उन्माद फैला कर चुनाव जीतना चाहता है. तो निशाना बूचडखाना बना.
भागलपुर के जिलाधिकारी ने 24 घंटे रोटेशन में अधिकारियों और पुलिस के जवानों की नियक्ति कर दी हो. माहौल एकदम शांत है. षड्यंत्र विफल रहा इससे जनता खुश है.
लोगों को परेशानी इन्टरनेट सेवा के बंद किये जाने से बहुत हुई. जो ऑफिस इसपर निर्भर हैं वे भी परेशान रहे.
एक व्यक्ति ने कहा-“संवेदनशील फोटो को यदि वायरल बनाने की कोशिश कीजिएगा तो जिला प्रशासन यही करेगा, और कोई उपाय नहीं भी है.”
भागलपुर स्मार्ट सिटी बनकर भी यदि प्रगति नहीं कर पा रहा है तो इसके पीछे यही मानसिकता है.

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