विक्रमशिला पर प्रेस क्लब ऑफ़ ईस्टर्न बिहार की अनमोल प्रस्तुति

भागलपुर:
प्रेस क्लब ऑफ़ ईस्टर्न बिहार द्वारा पहली बार प्रकाशित एक सोवेनियर-“विक्रमशिला बुद्धा महाविहार-कल और आज” का अनावरण राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा किया जाना अपने आप में एक बड़ी बात तो है ही, साथ ही इस पुस्तक में भागलपुर के प्राचीन धरोहर को जिस सलीके से सजाया गया है वह अद्भुत है.
बिहार के प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय पर जानकारी प्राप्त करने के लिए अब पाठकों को शायद ही बहुत दूर भटकना पड़े. यह सोवेनियर जिसका प्रकाशन अभी ताजा है में इतनी विस्तृत जानकारियां है कि एक साधारण पढ़ा-लिखा इंसान भी विक्रमशिला को अच्छी तरह से समझ जाएगा.
प्रेस क्लब ऑफ़ ईस्टर बिहार का गठन हुए भी बहुत दिन नहीं हुए. आम तौर यह माना जाता है कि पत्रकारों द्वारा बनाया गया संगठन आपसी विवादों में घिर कर कोई प्रगतिवादी काम नहीं कर पाता. लेकिन प्रेस क्लब ऑफ़ ईस्टर्न बिहार ने इस मिथक को तोड़ दिया.
पिछले 3 अप्रेल को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी प्राचीन विक्रमशिला बोधी महाविहार के दर्शन को आये. इसी दौरान उन्होंने इस सोवेनियर को रिलीज़ भी किया जो उन्हें समर्पित था.
यह किताब अब राष्ट्रपति भवन की शोभा बढ़ा रही है.
गीता प्रिंटिंग प्रेस में छापी इस सोवेनियर को पाठकों तक लाने में शिव शंकर सिंह पारिजात, डॉ रमण सिन्हा और गौतम सरकार की भूमिका अहम् है. इसके सम्पादन में एक प्रशासन से जुड़े, दूसरा इतिहासकार और तीसरा पत्रकार की भूमिका काम कर रही थी. और जिन लोगों ने इसमें योगदान दिया वे हमेशा याद किये जायेंगे कि उन्होंने भागलपुर को एक नई चीज दी.
पत्रकार गौतम सरकार ने इसमें एक लेख “More evidences on Dipankar’s original Birth –place” लिखा है जो काफी विस्तृत जानकारी देता है उस महान आत्मा के बारे में जिन्होंने विक्रमशिला में रहकर भारत की महान संस्कृति को समुद्र के पार फैलाया था.
इस सोवेनियर में अंग्रेजी, हिंदी और बंगला तीनों भाषोंओं को स्थान दिया गया है. डॉ रमण सिन्हा, डॉ कुमार राजेश, ओम प्रकाश पाण्डेय,अफ़ीक असद आजाद, शिव शंकर सिंह पारिजात, डॉ शशि शेखर तिवारी, अनुज कुमार शिवलोचन, डॉ नरेंद्र कुमार जायसवाल, राजेन्द्र सिंह और लामा तरनाथ आदि जैसे लेखकों के योगदान से यह सोवेनियर और भी महत्वपूर्म बन गया है.
इस सोवेनियर की तस्वीरें काफी सुन्दर है. कुछ प्राचीन तस्वीरों को देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि अंग प्रदेश में हमारे पूर्वज कैसे थे. यह पठनीय है.

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