भाजपा के अन्दर ही कुछ नहीं चाहते कि हेमलाल लिट्टीपाड़ा से जीतें !

लिट्टीपाड़ा (झारखण्ड):
भारतीय जनता पार्टी को झारखण्ड में हेमलाल मुर्मू जैसे मंझे हुए आदिवासी नेता की जरूरत पड़ रही है जो संथाल परगना के 18 विधान सभा और तीन लोक सभा सीटों में आदिवासियों को पार्टी के खेमे में बनाये रखे.
समस्या यह है कि हेमलाल मुर्मू अभी न तो विधायक हैं और ना ही सांसद.
संथाल परगना के लिट्टीपाड़ा में विधानसभा का उप-चुनाव चल रहा है जिसकी वोटिंग 9 अप्रैल को होगी.
इसमें भाजपा ने हेमलाल को उम्मीदवार बनाया है जो झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के साइमन मरांडी के भिड रहे हैं.
जानकारों का कहना हैं कि यदि यह चुआव हेमलाल जीत गए तो रातोरात वे संथाल परगना में भाजपा के सबसे बड़े नेता बनकर उभरेंगे और फिर पार्टी को किसी की ओर मुह नहीं ताकना पडेगा.
हेमलाल की जीत पक्की करने के लिए झारखण्ड के सारे बड़े भाजपा नेता, मुख्यमंत्री सहित, दिन रात एक किये हुए है. यहाँ तक कि लिट्टीपाड़ा के पास ही साहेबगंज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 अप्रैल को एक सभा करने वाले हैं जिसका सीधा प्रभाव इस उप-चुनाव पर पड़ सकता है. प्रधानमंत्री उस दिन साहेबगंज में गंगा पर एक पुल का शिलान्यास करेंगे.
हेमलाल 2014 के लोकसभा और 2014 के ही झारखण्ड विधान सभा का चुनाव क्रमशः राजमहल और बरहेट से हार चुके हैं. दोनों बार जेएमएम ने उन्हें हराया.
जेएमएम कभी भी हेमलाल को संथाल परगना में आगे बढ़ते नहीं देखना चाहेगी. हेमलाल जेएमएम से ही अलग होकर भाजपा में गये थे. जेएमएम उनकी राजनीतिक ताकत जानती है.
कहते हैं कि दोनों बार आदिवासी हेमलाल को ही वोट कर रहे थे पर तीर-धनुष निशान पर. तीर-धनुष जेएमएम का चुनावी निशान है. आदिवासी यह नहीं समझ पाए थे कि हेमलाल भाजपा में चले गए हैं.
बहुत से लोगों को इसपर यकीन नहीं होगा, पर यही हुआ था.
अभी जो लिट्टीपाड़ा में हेमलाल अपना प्रचार कर रहे रहे है वह आदिवासियों को समझा रहे हैं कि उनका निशान अब तीर-धनुष नहीं, बल्कि फूल (कमल) छाप है.
भाजपा की पूरी टीम इस बात का प्रचार कर रही है ताकि हेमलाल चुनाव जीतें और पार्टी को संथाल परगना में एक कद्दावर नेता मिले.
सूत्रों के अनुसार पार्टी के अन्दर कुछ आदिवासी नेता इस बात को लेकर चिंतित भी हैं. वैसे नेता जिन्होंने अभी-अभी सत्ता का सुख प्राप्त किया है और जो पूरी तरह से संथाल परगना में एक माफिया राज कायम करने में लगे हैं वे हेमलाल के लिए लिट्टीपाड़ा में प्रचार तो कर रहे हैं पर उन्हें हराने के लिए उनका षड्यंत्र भी चल रहा है.
सूत्रों के भाजपा के अन्दर संथाल परगना के कुछ आदिवासी नेता अपने समर्थकों को पूरी तरह से समझा चुके है कि हेमलाल को हराने में कोई कोर -कसर नहीं रहने देना है. हेमलाल की जीत के साथ ही उनकी माफियागिरी बंद हो सकती है. हो सकता है कि हेमलाल सरकार में मंत्री भी बना लिए जाएँ और किसी को इसके लिए हटना भी पड़ जाये.
भाजपा के अन्दर यह होता आया है. भाजपा के एक नेता सुनील सोरेन जिन्होंने दो बार दुमका से जेएमएम सुप्रीमो शिबु सोरेन के खिलाफ लोक सभा का चुनाव लड़ा उन्हें दुमका के कुछ भाजपा नेताओं ने ही भीतरघात कर हरा दिया. दुमका में भाजपा के अन्दर फूट जगजाहिर है. वही तरकीब अब लिट्टीपाड़ा में भी अपनाया जा रहा है.
संथाल परगना के एक आदिवासी नेता ताला मरांडी को पिछले साल भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष बनाया और फिर षड्यंत्र ऐसा हुआ कि तीन महीने के अन्दर ही उन्हें हटा दिया गया. ताला मरांडी लिट्टीपाड़ा के बगल के विधानसभा क्षेत्र बोरियों से विधायक हैं.

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