रघुबर लिट्टीपाड़ा में वोट मांगने आये, आदिवासी महिलाओं ने काला झंड दिखाया

लिट्टीपाड़ा (झारखण्ड): संथाल परगना के लिट्टीपाड़ा विधान सभा उप-चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हेमलाल मुर्मू के समर्थन में बुधवार को प्रचार करने गए मुख्यमंत्री रघुबर दास को आदिवासी महिलाओं ने काला झंडा दिखा कर अपना विरोध प्रकट किया.
यह विरोध राज्य की भाजपा सरकार द्वारा छोटानागपुर और संथाल परगना टेनेंसी एक्ट्स में बदलाव के विरोध में था.
सरकार और आदिवासी समाज के बीच यह लड़ाई पिछले एक साल से जारी है.
मुख्यमंत्री रघुबर दास आज लिट्टीपाड़ा विधान सभा क्षेत्र के खारोनी गाँव के एक स्कूल में चुनावी सभा कर रहे थे.
उनके संबोधन के समय बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाओं ने संथाल परगना टेनेंसी एक्ट्स में बदलाव को लेकर विरोध किया और मुख्यमंत्री को कला झंडा दिखाया. मौके पर खडी पुलिस ने महिलाओं के हाथों से काले झंडे छीन लिया.

इस विरोध के बाद रघुबर दास ने कहा कि चुनाव आयोग के यह नोटिस में लेना चाहिए कि यहाँ क्या हो रहा है.
उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग नहीं चाहते कि आदिवासियों का विकास हो. आदिवासी यदि कंदराओं में रहेगे तो उनको राजनीतिक लाभ होगा. वे लोग आदिवासियों का विकास नहीं चाहते.
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने सुधीर महतो के निधन के बाद उनकी पत्नी को टिकट नहीं दिया. उसी तरह अनिल मुर्मू के निधन के बाद उनकी पत्नी को भी टिकट नहीं दिया, किन्तु जब दुर्गा सोरेन का निधन हुआ तो उनकी पत्नी सीता सोरेन को टिकट दिया.
रघुबर ने झारखण्ड मुक्ति मोर्चा पर पैसे लेकर टिकेट बेचने का भी आरोप लगाया.
इस उप चुनाव में भाजपा और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के बीच सीधी लड़ाई होने जा रही है. भाजपा जेएमएम के परंपरागत सीट लिट्टीपाड़ा पर अपना कब्जा ज़माना चाहती है.

जेएमएम विधायक अनिल मुर्मू के निधन के बाद यहाँ उप चुनाव हो रहा है. जेएमएम ने अनिल की पत्नी युनिकी हांसदा को जब टिकट नहीं दिया तो वह भाजपा में शामिल हो गयी.
लेकिन चुनाव का असली मुद्दा संथाल परगना और छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट्स में सरकार द्वारा बदलाव लाना है. आदिवासी महिलाओं ने आज जिस तरीके से चुनावी सभा में मुख्यमंत्री का विरोध किया उसके मद्देनजर भाजपा की परेशानी बढ़ सकती है.

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