सीएनटी और एसपीटी एक्ट्स पर प्रधानमंत्री के रुख का 6 अप्रैल को इंतज़ार

लिट्टीपाड़ा (झारखण्ड): यह बहुत ही दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 6 अप्रेल को झारखण्ड के साहेबगंज में गंगा पुल का शिलान्यास करने आयेंगे को मुख्यमंत्री रघुबर दास द्वारा छोटानागपुर और संथाल परगना टेनेंसी एक्ट्स में किये गए बदलाव पर अपना क्या विचार रखते हैं.
प्रधानमंत्री पुल का शिलान्यास करने साहेबगंज उस वक्त आ रहे हैं जबकि उससे सटे विधानसभा क्षेत्र लिट्टीपाड़ा में उप-चुआव अपनी उफान पर होगा. लिट्टीपाड़ा पाकुड़ जिले में है जिसकी सीमायें साहेबगंज से जुडी हुई हैं.

कहने को तो यह एक उप-चुनाव है, किन्तु इसी में यह बात तय हो जाएगा कि आदिवासी भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा एक्ट्स में किये गए बदलाव के पक्ष में हैं या विपक्ष में. इस दृष्टि से इस उप-चुनाव का एक बड़ा राजनीतिक महत्व है.
झारखण्ड विकास मोर्चा सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी का कहना है कि सिर्फ उनकी ही पार्टी सरकार द्वारा एक्ट्स में परिवर्तन का विरोध कर रही हैं. बाकी के दलों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है.
“सरकार ने झारखण्ड की जनता की जमीन को हड़पकर पूंजीपतियों को खुश करने की जो योजना बनाई है उसके खिलाफ मेरी पार्टी हक़ और माटी की लड़ाई लड़ रही है. यह लड़ाई प्रखंड स्तर पर जारी है,”मरांडी ने कहा.
जहाँ तक मुख्य विपक्षी दल झारखण्ड मुक्ति मोर्चा का सवाल है इस दिशा में उसके आन्दोलन में निरंतरता नहीं दिखाई पड़ा रही है. ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार और जेएमएम के बीच एक गुप्त समझौता चल रहा है. पहले भी भाजपा ने जेएमएम से मिलकर सरकार बना चुकि है.
मुख्यमंत्री रघुबर दास ने हाल ही में दुमका में कहा था कि उन्हने एक्ट्स में बदलाव के पहले जेएमएम सुप्रीमो गुरूजी (शिबु सोरेन) को इसकी जानकारी दे दी थी.

लेकिन चुनाव के समय सत्ता और विपक्ष को अपनी तरफ से जनता को जो समझना है उसमें भाजपा और जेएमएम के बीच लड़ाई तो खुलकर होगी.
ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री और जेएमएम नेता हेमंत का कहना है कि लिट्टीपाड़ा में सीएनटी और एसपीटी एक्ट्स में बदलाव के मुद्दे तो खड़े होने ही हैं. पार्टी भाजपा के इस फैसले का पुरजोर विरोध करेगी. असली चुनावी मुद्दा तो यही होगा.
लिट्टीपाड़ा विधान सभा क्षेत्र में लगभग 45 प्रतिशत आदिवासी हैं. भाजपा नेताओं के लिए उन्हें यह समझना कठिन हो सकता है कि उसने इन दोने एक्ट्स जो आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा की गारंटी देता है को क्यों बदला.

जब झारखण्ड विधान सभा का चुनाव 2014 की शर्दियों में हो रहा था तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुमका की एक रैल्ली में कहा था कि उनके रहते किसी माई के लाल का मजाल नहीं कि आदिवासियों की कोई जमीन ले ले.
अब देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री 6 अप्रेल को साहेबगंज में इस सम्बन्ध में क्या कहते हैं.

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