अडाणी को गोड्डा में जमीन दिलाने के लिए कीमत 4,95,000 से घटा कर रघुबर ने 3,00,000 प्रति एकड़ किया: बाबूलाल

रांची: संताल परगना के गोड्डा जिले के जिस अबिक्रयशील रैयती जमीन की कीमत 2011 में 4,95,000 रुपया प्रति एकड़ झारखण्ड सरकार द्वारा लगाई गयी थी, उसी जमीन को 2015 में भारतीय जनता पार्टी की रघुबर सरकार ने घटा कर 3,00,000 रुपया प्रति एकड़ कर दिया गया.
“यह सब गुजरात के एक उद्योगपति अडाणी के लिए किया गया. यह एक सरकारी प्रपंच है जिसमे बड़े अधिकारीयों से लेकर मुख्यमंत्री तक शामिल हैं,” झारखण्ड विकास मोर्चा सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने “बॉर्डर न्यूज़” से कहा.
उद्योगपति अडाणी, जिनकी भारतीय जनता पार्टी सरकार में चलती –बनती है उनके लिए झारखण्ड की रघुबर दास की सरकार ने ना सिर्फ छोटानागपुर और संताल परगना टेनेंसी एक्ट्स में बदलाव किया बल्कि गोड्डा में अडाणी के लगाए जा रहे पॉवर प्लांट की जमीन को काफी घटा दिया गया.
झारखण्ड विकास मोर्चा इसे माटी और हक़ की लड़ाई बता रहा है जिसमे गोड्डा जिले के हजारों रैयत शामिल है.

“जो झारखण्ड मुक्ति मोर्चा जमीन के लिए आदिवासियों की हितैसी होने का दवा करती है वह अपने मुद्दों से पीछे हट गयी है और भीतर ही भीतर भारतीय जनता पार्टी को इस मामले में समर्थन दे रही है,” बाबूलाल का सीधा आरोप है.
आप अगर झारखण्ड सरकार के अभिलेखों और अधिकारीयों की इस सम्बन्ध में रिपोर्ट को पढेंगे तो असली बात समझ में आ जायेगी कि रघुबर दास की सरकार आखिर गोड्डा में कर क्या रही है.
गोड्डा समाहरणालय के भू-अर्जन विभाग की 26 मार्च 2011 की जो रिपोर्ट है उसमें अबिक्रयशील धानी जमीन (नंबर एक) की कीमत 4,95,000 आंकी गयी थी. दूसरे स्तर की धानी जमीन की कीमत 1,50,000 रुपया प्रति एकड़ थी और उच्च कोटि की बाडी की जमीन की कीमत 2,25,000 रूपये राखी गयी थी.
फिर जब जिंदल स्टील एंड पॉवर प्लांट ने गोड्डा में जमीन चाही तो 2013 में जमीन की कीमत 7,00,000 प्रति एकड़ कर दी गयी.
मालूम हो कि 2013 में गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को जिंदल के पॉवर प्लांट के शिलान्यास के लिए गोड्डा के सुन्दरपहाडी इलाके में लाए थे. यह इलाका पूरी तरह से नक्सल प्रभावित है. राष्ट्रपति के शिलान्यास के बावजूद जिंदल को जमीन नहीं मिली. मामला केंद्र में मनमोहन सरकार का कोल घोटाला बताया गया. अब रघुबर दास ने हाल ही में रांची में जो उद्योगपतियों का सम्मलेन किया उसमें जिंदल सहित तमाम तरह के धन कुबेरों को फिर से झारखण्ड में जमीन देने की घोषणा की है.
बाबूलाल मरांडी का कहना है कि सिर्फ एक उद्योगपति अडाणी को गोड्डा में जमीन देने के लिए इसकी कीमत घटा दी गयी जिसके लिए प्रधान सचिव योजना सह वित्त विभाग के अध्यक्ष अमित खरे को यह टास्क सौपा गया कि गोड्डा में जमीन की कीमत कैसे कम किया जाये.
दिनांक 7 अक्टूबर 2015 को अमित खरे ने एक बैठक बुलाई जिसमें संताल परगना के सभी उपयुक्त, उप निबंधन महानिरीक्षक, निदेशक उद्योग और सचिव राजस्व एवं भूमी सुधार विभाग शामिल हुए.
बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई उनमें एक 26 मार्च 2011 के गोड्डा भू –अर्जन की रिपोर्ट भी शामिल थी. अडाणी को जमीन गोड्डा में चाहिए था. इसलिए इस बैठक में कहा गया कि समिति द्वारा राजस्व एवं भूमी सुधार के पत्र संख्या 292 दिनांक 26/ 03/ 2011 पर चर्चा की गयी जिसके आधार अपर अब जमीन की कीमत 3,00,000 रुपया प्रति एकड़ होगी.

फिर रघुबर सरकार के कैबिनेट ने इस संशोधन को स्वीकार कर लिया और 28 अक्टूबर 2015 को इसपर मुहर लगा दी.
“इससे साफ़ जाहिर होता है कि उद्योगपति अडाणी को सस्ते में गरीब किसानों की जमीन दिलाने के लिए सरकार ने पहले छोटानागपुर और संताल परगना के टेनेंसी एक्ट्स में बदलाव लाया और फिर अपने अधिकारियों को जमीन की कीमत घटाने को कहा. यह बात किसानों को पता ही नहीं,” बाबूलाल ने कहा.
उन्होंने कहा कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, जो प्रमुख विपक्षी दल है, ने कभी आवाज नहीं उठाई. ऐसे में झारखण्ड विकास मोर्चा ने किसानों के लिए हक और माटी की लड़ाई शुरू की है.
(संताल परगना में जमीन घोटाल पर बाबूलाल से चर्चा फिर अगले अंक में)

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