उधर धुआं है, जरूर कुछ हुआ है !

पटना: तर्कशास्त्र के अनुसार जहाँ धुआं होती है वहां आग नहीं होता, किन्तु शायर कहते हैं- उधर धुआं है, जरूर कुछ हुआ है!

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नोटबंदी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्थन देना तर्क और शायरी दोनों से मेल खा रही है.

यह राजनीति है तो यहाँ कुछ भी हो सकता है, ऐसे शब्द नीतीश कुमार बिहार के मामले में पहले भी बोल चुके है.

लेकिन नोटबंदी पर उनका मोदी को दिया जने वाला समर्थन से उनके ही दल के लोगों में बेचैनी दिख रही है. महागठबंधन तो अलग बात है.

ऐसे में नीतीश कह उठे कि कुछ लोग उनकी “राजनीतिक हत्या” करना चाहते है.

नीतीश ने उन हर बातों का खंडन किया जिसमें उनपर कथित तौर पर कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उनकी मुलाकत भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित साह से हुई.

एक मुख्यमंत्री का प्रधानमंत्री से आधिकारिक तौर पर मिलना कोई नई बात नहीं है. फिर भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मजाकिया लहजे में अपना विरोध दर्ज करते हैं कि विधायक और पार्षद चाहें तो उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री से करा सकते हैं. मतलब ये सारी बातें मनगढ़ंत है.

फिर भी राजनीति में समर्थन और विरोध का अपना महत्व है. नीतीश ने नोटबंदी पर मोदी की नीतियों को समर्थन क्या दिया लगे अमित साह उछालने. नीतीश को बढाई दे डाली.

जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपना पक्ष इस मुद्दे पर रखते है तो धुंआ में भी आग दिखने लगता है, जो तर्कशास्त्र के अनुसार गलत है, किन्तु शायराना अंदाज में तो सही.

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