नीतीश के मोदी समर्थन का अर्थ ही अलग है

पटना: नोटबंदी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश का नैतिक समर्थन मिल रहा है.

ऐसे समय में जबकि मोदी विरोधियों की गोलबंदी इस मामले में देखने लायक है, नीतीश कुमार, जिन्होंने हाल ही में भारतीय जनता पार्टी से हटकर लालू यादव के साथ हाथ मिलाया, ने प्रधानमंत्री के नोटबंदी के मुहिम को यदि समर्थन दिया है तो उसके पीछे कुछ साल पहले उनके द्वारा पटना में की गयी विशेष करवाई हो सकती है.

जब नीतीश भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर बिहार की सत्ता चला रहे थे तो उन्होंने कुछ बेनामी संपत्ति वाले लोगों के घरों पर सरकारी कब्जा करा दिया था.

उनका मानना था कि ऐसे बेनामी संपत्ति वाले घरों को कब्ज़ा कर इसमें बच्चों के लिए सरकारी स्कूल खोले जायेंगे.

अब नीतीश कुमार नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री से बेनामी संपत्ति पर भी हमले करने की मांग कर रहे हैं.

इस मामले में यदि मोदी और नीतीश की कारवाई एक ही दिशा में जा रही है तो नीतीश का नोटबंदी पर मोदी के विरोध का सवाल कहाँ उठता है.

ऐसे में उन्होंने 28 नवम्बर को विपक्ष के नोटबंदी पर भारत बंद से अपना पैर खीच लिया है.

नीतीश ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मामले में मोदी विरोधी मुहिम से खुद को यह कहते हुए अलग किया कि हर पार्टी अपने फैसले लेने में स्वतंत्र है.

तब फिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित साह कहाँ पीछे रहने वाले थे, उन्होंने आज नीतीश की जमकर तारीफ कर दी.

इसका मतलब यह नहीं निकलता की नीतीश कुमार बिहार में मेहनत से बनाये गए अपने महागठबंधन से अलग हो रहे हैं. वह एक मंझे हुए राजनेता हैं.

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