झारखण्ड सरकार ने राजमहल के इतिहास का सर्वनाश किया !

राजमहल: झारखण्ड सरकार ने राजमहल की पहाड़ियों को तोडवाकर भारत के सबसे प्राचीन इतिहास का सर्वनाश कर दिया.

भू-गर्भ एवं प्राणी-विज्ञान के वैज्ञानिक अब इन पहाड़ियों की खाख छान रहे हैं.

यह सर्वविदित है कि धरती के बनने के काल में भारत के इतिहास की जानकारी का श्रोत राजमहल की पहाड़ियां हैं.

भारत की एक प्राचीनतम पहाडी श्रंखला जिसे राजमहल की पहाडी के नाम से जाना जाता है, को झारखण्ड सरकार ने जिस तरह से पत्थर के व्यापारियों को तोड़ने के लिए लीज पर दे रखा है और जिस प्रकार इन पहाड़ों को अंधाधुंध तरीके से तोड़ा जा रहा है उसमें प्राणी विज्ञानं के सबूत मिटते जा रहे हैं.rajmahal-fossils

राजमहल की पहाड़ियों के अन्दर क्या नहीं है इसका सबूत इसी सप्ताह कलकत्ता यूनिवर्सिटी से आये दो वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकला. यहाँ से प्राणी –विज्ञानं के प्रोफेसर डॉ पार्थो तालुकदार और डॉ प्रणति हजारा आये थे.

यह टीम साहेबगंज के मिर्जाचौकी इलाके और राजमहल सव-डिवीज़न के कटघर गाँव तक गयी जहाँ उन्हें जुरासिक युग के जीवाश्म मिले हैं.

इस टीम के साथ साहेबगंज कॉलेज के भू-विज्ञानं के प्रोफेसर डॉ रणजीत कुमार सिंह भी थे जिनके अनुसार कलकत्ता और झारखण्ड के सिदो-कान्हू यूनिवर्सिटी राजमहल की पहाड़ियों में प्राचीन पर्यावरण को खोजेंगे जो जुरासिक ज़माने में थीं.raj-1

टीम ने मिर्जाचौकी के मनडरो प्रखंड के कई गाँव का सर्वेक्षण किया. इस दौरान उन्हें लगभग 3.7 करोड़ साल पुराने जीवाश्म मिले हैं.

इन वैज्ञानिकों का कहना है कि जो जीवाश्म पाए गए हैं उनसे उन दिनों के पर्यावरण तथा उनके विलुप्त होने के कारणों के अलावा वर्तमान समय में इसपर आने वाले प्रभावों का भी पता लग सकता है.

लेकिन झारखण्ड सरकार राजमहल पहाडी श्रृंखलाओं को पत्थर के व्यापर के लिए बेच दिया है.

हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने झारखण्ड सरकार के इस कदम की दुमका में आलोचना की थी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *