रांची में आदिवासी विरोध के बीच रघुबर का नया फरमान

रांची: छोटानागपुर और संताल परगना टेनेंसी एक्ट्स में बदलाव के फैसले के विरोध में जहाँ मोरहावादी मैदान में शनिवार को लगभग 35 आदिवासी संगठनों ने मिलकर एक रैली की, वहीं मुख्यमंत्री रघुबर दस ने कल्याण विभाग द्वारा रांची में ही आयोजित एक सम्मलेन में कहा कि कोई भी आदिवासियों की जमीन नहीं ले सकता.

इन दिनों आदिवासी समुदाय और सरकार के बीच झारखण्ड में एक अविश्वास की स्थिति पैदा हो गयी है.

उपर्युक्त एक्ट्स में संशोधन के प्रस्ताव को सरकार ने राष्ट्रपति क पास भेजा है. इस बीच झारखण्ड के आदिवासी चिंतित है कि उनकी जमीनों का क्या होगा.

मुख्यमंत्री रघुबर दास ने भरोसा दिलाया उनके राज में ऐसा कभी नहीं होगा.

उन्होंने कहा, “कौन उद्योगपति पैदा हुआ है जो झारखण्ड को बेचने की हिम्मत कर सके.”

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने आदिवासियों की रैली को समर्थन दिया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि जेएमएम के नेताओं को अपनी संपत्ति की जाँच सीबीआई से करनी चाहिए.

“मैं अपनी संपत्ति की जाँच करवाने को तैयार हूँ, जेएमएम के नेताओं को भी तैयार रहना चाहि,” उन्होंने कहा.

जाहिर है इशारा शिबू सोरेन और उनके पुत्र हेन्मंत सोरेन पर था. दोनों संथाल परगना से आते हैं.

रघुबर दास ने कहा कि संथाल परगना से तीन बार मुख्यमंत्री रहे. लेकिन सबसे ख़राब हालत संथाल परगना की है जहाँ भयानक गरीबी और कुपोषण है.

उन्होंने फिर दोहराया कि झारखण्ड को सिर्फ लूटा गया इतने वर्षों में. इससे पहले वह यही बात पाकुड़ में भी कह चुके थे. उन्होंने पलायन और विस्थापन पर गहरी चिंता व्यक्त की.

उधर झारखण्ड आदिवासी संघर्ष मोर्चा की आक्रोश रैली ने राजधानी रांची का जन जीवन अस्त व्यस्त कर दिया. कई जगह पुलिस के साथ आदिवासियों की झडपें हुई, इनके सबसे अधिक घटना खूंटी जिले से आ रही है जहाँ पुलिस ने कथित रूप से लोगों को रैली में जाने से रोका.

 

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