दुमका आकर मोदी का सपना टूटा: नहीं चली दुमका-भागलपुर रेल

भले भी प्रधानमंत्री नरेंद मोदी भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में लगे हों, एक छोटे से इलाके दुमका, जिसे झारखण्ड की उप-राजधानी का दर्जा मिला हुआ है, के लोगों के अरमान पिछले 17 वर्षों से महज 20 किलोमीटर नवनिर्मित रेल लाइन के नीचे दबे हुए हैं.

लोगों को इंतजार है कि कब दुमका से भागलपुर (बिहार) के लिए सीधी ट्रेन चलेगी.

पिछले 17 सालों में कम से कम पांच रेल मंत्री-नीतीश कुमार, लालू यादव, ममता बनर्जी और सुरेश प्रभु मिलकर भी एक छोटी सी लाइन का निर्माण नहीं करा पाए.

दुमका के सांसद हैं शिबु सोरेन जिनको झारखण्ड एक अलग राज्य के निर्माण का श्रेय जाता है, पर वे भी महज एक ट्रेन को लेन में नकामयाब रहे. यहाँ की विधायक मंत्री सत्ता दल भाजपा की लुईस मरांडी है, जिनकी इस दिशा में कुछ चलती ही नहीं है, या फिर इसमें उनकी कोई रूचि भी नहीं दिखती.

“यह सब राजनीतिक गुणा-भाग का ममला है. पूर्व और वर्त्तमान रेल मंत्रियों-नीतीश, लालू, ममता और प्रभु में से किसी का इस इलाके में कोई जनाधार नहीं है तो उन्हें यहाँ की जनता से कोई मतलब भी नहीं. आप खुद सोचिये कि 17 साल का समय कितना लम्बा होता है,” दुमका की जनता की यही राय है.

पिछले महीने दुमका-भागलपुर रेल खंड पर हंसडीहा से बरापलासी के बीच सी आर एस भी हुआ. सोशल माडिया में जाने कहाँ से एक रेल चार्ट वायरल हुआ जिसमे लिखा था कि हावड़ा से जमालपुर वाया दुमका एक जन शताब्दी गाडी चलगी. इसकी समय सारणी भी जारी की गयी पर किस दिन से चलेगी उसकी कोई सूचना नहीं थी.

आसनसोल रेलवे डिवीज़न से बात कीजिये तो कोई किसी भी प्रकार की सूचना इस संबंध में नहीं देता. दुमका में लोग एक ही बात कहते हैं- “अब तो कृपा करो प्रभु. सत्रह साल हो गए, कब आओगे.”

e.o.m

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *