शहाबुद्दीन के दिन गिनती के, चंदा बाबू ने किया वकालतनामा पर दस्तखत, मामला सुप्रीम कोर्ट जाएगा

बिहार में सिवान के जिले के चंद्र्केश्वर प्रसद उर्फ़ चंदा बाबू और उनकी धर्मपत्नी कलावती देवी के हाथों में इन तीन तस्वीरों को देखिये.

ये उनके तीन अभागे लड़के हैं जिन्हें राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व सांसद मुहम्मद शहाबुद्दीन और उनके गुर्गे ने कथित रूप से 2004 में तेजाब से नहला कर मार दिया था.

इसी आरोप में शहाबुद्दीन को ग्यारह साल तक जेल में रहना पडा. किन्तु बिहार सरकार की कोताही के कारण वे 10 सितम्बर को भागलपुर जेल से जमानत पर रिहा हो गए.

बिहार में इस मामले में बबाल मचा हुआ है.

चंदा बाबू की मदद को देश के एक नामी वकील प्रशांत भूषण आगे आये हैं.

गुरुवार को प्रशांत भूषण ने वकीलों की एक टीम चंदा बाबू के घर भेजा. उन्होंने वकालत नामा पर अपना दस्तखत कर दिया है. अब भूषण सुप्रीम कोर्ट में शहाबुद्दीन को मिली जमानत के खिलाफ याचिका दायर करेंगे.

चंदा बाबू ने पत्रकारों से कहा कि वे अपना मुकदमा प्रशांत भूषण को ही सौपेंगे. उनके तीन लड़के राजीव रौशन, गिरीश और सतीश की हत्या शाहबुद्दीन ने की थी.

इस बुजुर्ग दम्पती के जीवन में अब कुछ भी नहीं रह गया है. बिहार के नेता इन दिनों इस मुद्ददे पर राजनीति घुड़दौड़ कर रहे हैं.

e.o.m

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