कभी ख़त्म नहीं होती बंगाल की तड़प

बंगाल की तड़प कभी ख़त्म नहीं होती. ऐसा लगता है मनो वह हमेशा अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा हो. बंगाल में जब ही कोई मजबूत सरकार होती है उसकी सीमायें, उसके नाम और उसकी सोच को बदलने की कोशिश करती हैं.

अगर आप हिन्दी भाषी हैं तो अब आप पश्चिम बंगाल को सिर्फ बंगाल कहेंगे. अंग्रेजी में इसका उच्चारण अब बेंगाल करना होगा. और भद्र मानुष बंगाली लोग अब इसे बांग्ला कहेंगे.

किसी ने कहा है कि नाम में क्या रखा है, गुलाब को किसी भी नाम से पुकारो उसकी खुशबु हमेशा बरकरार रहती है.

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार ने बंगाल का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र के पास भेज दिया. बंगाली भाषा में इसका नाम बांग्ला होगा. यह इसका मूल नाम होगा, जबकि हिंदी भाषी इसे बंगाल और अंग्रेजी भाषी बेंगाल कहकर बुलाएँगे.

सनद रहे कि जब कलकत्ता का नाम कोलकाता किया गया तो बहुत सारे अंग्रेजी की भारतीय पत्रिकाएं कलकत्ता ही लिखती रहीं. विदेशो में कोई कोलकाता नही जानता, इसे आज भी कलकत्ता के नाम से ही जाना जाता है.

ब्रिटिश भारत में बंगाल कितना बड़ा था इसकी आज की पीढी कल्पना भी नहीं कर सकती. नवाबों द्वारा 1757 में प्लासी और 1764 में बक्सर की लड़ाई अंग्रेजों से हार जाने के बाद 1765 में बंगाल प्रेसीडेंसी की गठन किया गया. ब्रिटिश भारत में यह वर्तमान पाकिस्तान के खैबर दर्रे से लेकर बर्मा (मायंमार), सिंगापुर, बांग्लादेश, असम, उड़ीसा और बिहार-झारखण्ड तक फैला हुआ था.

लाल, बाल पाल (लाल लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चन्द्र पाल) की तिकड़ी ने आजादी का ऐसा बिगुल फूंका कि बंगाल के तात्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड कर्जन ने 1905 में “बंग भंग” कर दिया.

बंगाल से पूर्वी बंगाल और असम को काटा और उसकी राजधानी ढाका और सिलोंग बना दी गयी. आजादी के बाद पूर्वी बंगाल पाकिस्तान में चला गया और 1971 में उससे अलग होकर एक नया देश बंगलादेश बना.

आगे 1911 के दिल्ली दरबार में तो भारत की प्रशासनिक राजधानी कलकत्ता से हटा कर दिल्ली कर दी गयी.

19 वीं सदी के अंत में बिहार भी अपने अस्तित्व की लड़ाई बंगाल से लड़ रहा था. बिहार को सफलता मिली और 1912 में बिहार और उड़ीसा को भी बंगाल से अलग कर दिया गया. उड़ीसा जो भाषाई रूप से बिहारियों से दूर- दूर का नाता नहीं रखता था, ने खुद का आन्दोलन शुरू किया और 1934 में वह भी बिहार से अलग हो गया. सन 2000 में बिहार से फिर झारखण्ड अलग हुआ.

बंगाल के रूप कई बार बदले, कई टुकड़े हुए लेकिन एक बात तो साफ़ है कि बंगाल की संस्कृति आज भी किसी न किसी रूप में उन देशों और प्रदेशों में बरकरार है जो कभी इसके अंग थे. फिर भी बंगाल खुद को ही खुद में ढूँढ़ रहा है.

e.o.m

 

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